Tuesday, 3 February 2015

हमारी सोच : Only Get for Self & Don't Share for Help

                   कुछ दिन पहले मैं जबलपुर गया था एक परीक्षा देने, कुछ और भी बन्‍दे जा रहे था क्‍योंकि वहां पर आर्मी की भर्ती भी थी । सौभाग्‍य से उस डिब्‍बे में एक दो आर्मी के जवान भी थे । बातों बातों में पता चला कि कौन कहां जा रहा है। कुछ ग्रामीण आदमी भी थे, और कुछ शहरी । लोगों ने कहा - बस, यह दौड़ निकाल लो, फिर तो जिन्‍दगी भर ऐश ही ऐश है, खाने को काजू, बादाम हर प्रकार की मेवा मिलेगी, जब तक नौकरी है तब तक सुविधा और नौकरी के बाद पेंशन तो मिलेगी ही । बहुत ही अच्‍छी नौकरी है आर्मी की ।

            उन की बात सुनकर आर्मी वाले जवानों ने कहा- सर आप लोग किसी गलतफहमी में हैं क्‍योंकि आर्मी में ऐसा कोई नियम नहीं है कि आपको मेवा, और सभी सुविधाएं दी ही जाएंगीं । तब उन लोगों का कहना था कि आपको पता नहीं मेरी जानकारी में तो सब सुविधाएं हैं, बस एक बार कैसे भी काम बन जाए उसके बाद आराम ही आराम है ।